महाकुंभ मेला 2025 में कब, क्यो और कहाँ लगा हैं, जानिए विस्तारपूर्वक | kumbh mela 2025



नमस्कार दोस्तों!                                                          आज हम आपलोगों को  प्रयागराज में  आयोजित कुंभ मेला 2025 के  बारे में PublicPilot के माध्यम से संपूर्ण जानकारी देते हैं। इसके लिए आपको ध्यानपूर्वक व शांति-भाव से पुरा पढ़ना होगा, तो शुरू करते हैं जय श्री राम का नाम  लेकर ......


🎁 Latest News...🤝 आज जानेंगे, ये मुख्य बातें :-      

🎯 कुंभ मेला 2025 में कब से और कहाँ आयोजित हो रहे है?
🎯 इस मेला क्यों हैं, सबके लिए खास?
🎯 क्या होता हैं कुंभ, जानिए इसका संपूर्ण इतिहास। 
🎯 इस मेला का क्या है महत्व?
🎯 2025 का कुंभ, महाकुंभ ही क्यों?
🎯 इस मेले में कितने संख्या में श्रद्धालुओं की आनें की        संभावनाएं हैं?
🎯 कितने प्रकार के होते हैं कुंभ?
🎯 इस मेला का क्या है पौराणिक, धार्मिक, खगोल विज्ञान व ज्योतिष का महत्व ।
🎯 इस बार कितना आवंटित हैं प्रयागराज का मेला बजट 2025 
🎯 यह मेला कैसे बदलेंगे,भारत व U.P की अर्थव्यवस्था?
🎯 जानिए इस मेला में क्या-क्या उपलब्ध संपूर्ण सुविधाएं?


कुंभ मेला 2025 में कब से और कहाँ आयोजित हो रहे है?

अबकी बार 2025 का महाकुंभ मेला 13 जनवरी से शुरू हो कर 25 फरवरी तक चलेंगे, जो प्रयागराज (उत्तर प्रदेश राज्य) में आयोजित हो रहे हैं।
अपने  परिवार के साथ जाना मत भूलिए, क्योंकि यह सिर्फ कुंभ ही नहीं, बल्कि पूर्ण कुंभ और महाकुंभ भी हैं। यह मौका आने वाली तीन पीढ़ियों को नसीब नहीं होगा। यह मौका दुबारा सिर्फ 144 साल के बाद ही मिल  सकता हैं।

जानिए इस मेला में क्या-क्या  सुविधाएं उपलब्ध हैं और व्यवस्था कैसी हैं?

दोस्तों ! प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होने वाले महाकुंभ 2025 का मेला भी महत्वपूर्ण केवल संस्कृति और धार्मिक परिपेक्ष के लिए सीमित नहीं हैं, बल्कि यह अर्थव्यवस्था के लिए भी खास हैं । अनुमान लगाया गया है कि प्रयागराज में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालु आ सकते हैं, जिनके लिए भारत सरकार और U.P सरकार दोनों सरकार द्वारा  कुछ खास मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही साथ सरकार 5060 करोड़ रुपये का खर्चा करेगी।
 इस बार सभी श्रद्धालुओं के लिए लगभग 4000 हेक्टेयर यानी 15946.53 बीघा में अस्थायी शहर बनाया गया है, जिनमें यात्रियों के लिए लगभग - 
✍🏼 1.60 लाख सोने के लिए टेंट लगें हैं।
✍🏼  स्नान करने के लिए 9 पक्के धाट बनें हैं।
✍🏼 30 पैंटून ब्रिज बनें हैं।  
✍🏼 400 किलोमीटर के लंबे अस्थायी सड़क बनाए गए हैं।
✍🏼 रात्रि में कोई दिक्कत न हो, उसके लिए टेंट सिटी में 67      हजार स्ट्रीट लाइट  लगाए गए हैं ।
✍🏼परिवहन को अधिक सुविधाजनक एवं आसान बनाने के  लिए 550 सटल( stuttl) बसें और 7000 रोडवेज बसें        चलाई जा रही है। इसकी सर्विस के लिए 7 बस स्टैंड            बनाए गए हैं ।
✍🏼 U.P जल निगम ने 1250 km की पाइपलाइन बिछाई है, जहाँ 85 नल के बूथ और 200 पानी ATM भी हैं ।और         1.5 लाख टाॅयलेट बनाएँ गए हैं। 10000 सफाईकर्मी        24 घंटे साफ- सफाई के लिए  तैनात रहेंगी।   
✍🏼 रेलवे मंत्री अश्विनी वैभव के अनुसार श्रद्धालुओं के लिए      3000 स्पेशल ट्रेन सहित कुल 13000 ट्रेनों को चलाई          जा रही है।
✍🏼 निगरानी के लिए 23000 CCTV कैमरे लगाए गए हैं।  साथ ही साथ ड्रोन से कड़ी निगरानी भी की जा रही है। 









कुंभ मेला की शुरुआत कैसे होते हैं?

इस मेला की शुरूआत एक शाही स्नान से होती हैं, जिसमें अलग-अलग संप्रदाय और 13 अखाड़ों के महापुरुषों यानी नागा साधु,सिध्दी प्राप्त गुरू नदी में स्नान कर इस मेला  की शुरूआत करते हैं। इनके बाद ही कोई अन्य श्रद्धालुओं इस नदी में पवित्र डुबकी लगाते हैं। इसे ही कुंभ स्नान कहा जाता है।







यह मेला क्यों हैं, सबके लिए खास और महत्व ?

इस बार का महाकुंभ का मेला आस्था, संस्कृति और पुरानी परंपराओ को एक साथ एक साथ जोड़ने वाली अदभुत मेला है। यह सिर्फ कुंभ ही नहीं, बल्कि पूर्ण कुंभ और महाकुंभ भी हैं। यह मौका आने वाली तीन पीढ़ियों को नसीब नहीं होगा। यह मौका दुबारा सिर्फ 144 साल के बाद ही मिल सकता हैं।
यहां सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे संसार से आए हुए लाखों लोग डुबकी लगाने आते हैं। कुंभ में किसी भी प्रकार से जाति,वर्ण, वर्ग, समुदाय, पंथ या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता हैं। सभी एक ही मकसद से यहाँ आते हैं, वह हैं- मोक्ष
साथ ही साथ यहाँ  धार्मिक चर्चाए भी होती हैं, जहाँ पर सभी भक्त एक साथ बैठकर भक्ति, साधना, जप- तप व भोजन भी करते हैं। संस्कृति एवं आस्था  का ज्ञान भी आदान-प्रदान होता हैं।




कुंभ मेला इन्ही जगहों पर क्यों  होता हैं?

 माना जाता है कि जब देवता और दानवों दोनों मिलकर समुंद्र मंथन किए, तब मंथन के दौरान कुल 14 चीज़ें निकली। जो इस प्रकार है :-
हलाहल विष , कामधेनु गाय, ऐरावत हाथी , कल्प वृक्ष ,अप्सरा रंभा ,माता लक्ष्मी ,पाॅच जन्य शंख, पारिजात वृक्ष, शारंग  धनुष जैसी चीजें प्राप्त हुआ। और अंतिम समय मे निकला - अमृत कलश।
अमृत को देख कर देवताओं और दानवों में लड़ाई होने लगे । इसी बीच जयंत (इन्द्र का पुत्र) अमृत कलश को लेकर भागते रहे और अमृत के कुछ बुंदे पृथ्वी पर चार जगहों पर गिरे। यह जगह हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन व नासिक था। इसलिए इन जगहों पर कुंभ मेला  बारी- बारी से लगते रहता है। यह मेला हर 12 साल में आयोजित किया जाता हैं। और महाकुंभ 144 साल बाद होता है।




 कितने प्रकार के होते हैं कुंभ मेला?

   यह मेला चार प्रकार के होते हैं:-
1. अर्ध्द कुंभ - यह 6 साल में एक बार होता हैं।
2. कुंभ
3. पूर्ण कुंभ-  यह 12 साल में एक बार होता हैं।
4.  महाकुंभ- यह 144 साल में एक बार होता हैं 

इस मेला का क्या है पौराणिक,धार्मिक, खगोल विज्ञान व ज्योतिष का महत्व क्या है?

इसके लिए आपको ध्यानपूर्वक व शांति-भाव से पुरा देखना  होगा, तो शुरू करते हैं जय श्री राम का नाम  लेकर ......

यह मेला कैसे बदलेंगे,भारत व U.P की अर्थव्यवस्था?

इसके लिए आपको ध्यानपूर्वक व शांति-भाव से पुरा देखना  होगा, तो शुरू करते हैं जय श्री राम का नाम  लेकर  ....
 आज करेंगे व्यपार और मैनेजमेंट की बातें । समझें इसे विस्तार से सरल निचोड़ व सटीक भाषा में !

🎁Note:- 

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  धन्यवाद!









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